मध्य प्रदेश मे भावांतर योजना के लिए 10 अक्टूबर से शुरू होंगे पंजीयन

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने दिए निर्देश

मध्य प्रदेश मे भावांतर योजना के तहत किसानों के पंजीयन का काम 10 अक्टूबर 2025 से शुरू होगा। जिसको लेकर मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सभी जिले के कलेक्टर्स को आवश्यक निर्देश दिए।

सोयाबीन की खेती करने वाले किसानों भाइयों को उचित मूल्य उपलब्ध कराने के लिए मध्य प्रदेश सरकार द्वारा भावांतर योजना शुरू की जा रही है।

जिसका लाभ राज्य के पंजीकृत किसानों को दिया जाएगा।

शुक्रवार, 26 सितंबर के दिन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोयाबीन उत्पादक किसानों के लिए लागू की जा रही भावांतर योजना के संबंध में वीडियो कॉन्फ्रेंस द्वारा कलेक्टर्स को निर्देश दिए है।

वीडियो कांफ्रेंस में वरिष्ठ विधायक और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल भी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी कलेक्टर्स किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य दिलवाने के लिए व्यवस्थाएं सुनिश्चित करें।

किसी भी स्तर पर गड़बड़ी नहीं होना चाहिए। हितग्राही को सीधा लाभ मिलना चाहिए। हमारे सभी के प्रयासों से भावांतर योजना पूर्णता सफल होगी।

मुख्य मंत्री मोहन यादव ने कहा कि इस योजना की विशेषताओं को प्रत्येक स्तर पर प्रचारित किया जाए, जिससे अधिक से अधिक किसानों को भावांतर योजना का लाभ मिले।

भावांतर योजना

10 अक्टूबर 2024 से शुरू होंगे किसानों के पंजीयन

भावांतर योजना के लिए निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार मध्य प्रदेश में ई-उपार्जन पोर्टल पर पंजीयन का कार्य 10 अक्टूबर 2025 से प्रारंभ होकर 25 अक्टूबर 2025 तक चलेगा। एस बीच किसान भाई अपना पंजीयन कर सकेंगे ।

भावांतर की अवधि 01 नवम्बर 2025 से 31 जनवरी 2026 तक रहेगी इस बीच किसान भाई अपनी उपज मंडी मे बेचेंगे । पंजीकृत किसान और उनके रकबे के सत्यापन की प्रक्रिया राजस्व विभाग के माध्यम से होगी।

किसानों कों भावांतर की राशि पंजीयन के समय दर्ज बैंक खाते में सीधे हस्तांतरित की जाएगी। मतलब किसान कों सीधा लाभ दिया जाएगा।

क्या है मध्य प्रदेश मे भावांतर योजना

प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान के अंतर्गत अधिसूचित तिलहनी फसल के लिए भावांतर योजना वर्ष 2018-19 से लागू की गई है।

भारत सरकार ने घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य MSP तथा राज्य के मंडी के मॉडल भाव/विक्रय मूल्य अंतर की राशि किसानों को दिलवाने का प्रावधान किया है।

उदाहरण के लिए किसान कि उपज का विक्रय मॉडल भाव 4600 रूपए पर हुआ है तो समर्थन मूल्य 5328 में से शेष अर्थात् भावांतर राशि 628 रूपए प्रति क्विंटल राज्य सरकार द्वारा प्रदान किए जाएंगे। किसान को समर्थन मूल्य बराबर ही राशि प्राप्त होगी।

किसान पूर्व की तरह अपनी उपज मंडियों में बेचेंगे। एमएसपी और मंडी का मॉडल भाव/विक्रय मूल्य के बीच जो अंतर होगा उस राशि को किसानो कों डीबीटी के माध्यम से भुगतान किया जायेगा। इसके लिए किसान द्वारा ई-उपार्जन पोर्टल पर पंजीयन कराना अनिवार्य होगा।

यदि किसान की उपज का विक्रय मूल्य एमएसपी से कम है परंतु राज्य के औसत मॉडल प्राइज के समतुल्य है, ऐसी स्थिति में भी किसान को एमएसपी और बिक्री मूल्य के भावांतर की राशि प्रदान की जाएगी।

तीसरी स्थिति में कृषि उपज का विक्रय मूल्य राज्य के औसत मॉडल प्राइस से कम होने की दिशा में किसान को एमएसपी और घोषित औसत मॉडल प्राइस के भावांतर की राशि प्रदान की जाएगी।

प्रत्येक स्थिति में किसान का लाभ सुनिश्चित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कलेक्टर्स को दिए निर्देश

  • कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री ने निर्देश देते हुए कहा कि भावांतर योजना के लिए सभी आवश्यक व्यवस्था की जाएं। कलेक्टर और संबंधित अधिकारी किसानों का हित निश्चित करें। अधिकारियों को क्षेत्रवार दायित्व दिए जाएं।
  • भावांतर योजना के क्रियान्वयन को प्राथमिकता दें।
  • जिला स्तर पर नियमित समीक्षा भी हो की जाए । किसानों को सही दाम मिले, इसकी मॉनिटरिंग हो।
  • भावांतर योजना किसानों के हित में है, इसका प्रचार-प्रसार किया जाये।
  • सभी जनप्रतिनिधि सोशल मीडिया से प्रचार में सहयोग करवाएं ।
  • पात्र किसान समय पर पंजीयन करवा लें जिससे पात्र किसान लाभ से वंचित न रहें।

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