Chane ki buvai और अच्छी पैदावार के उपाय

Chane ki buvai से लेकर खाद और दवाई तक की पूर्ण जानकारी आज हम आपको देने वाले है । चने कि खेती एक ऐसी खेती है जिसकी एक ही खेत मे अगर बार बार बुवाई कि जाए और खाद और उर्वरक का संतुलन ना किया जाए तो फसल कि पैदावार कम हो जाती है। आज हम आपको खाद और उर्वरक कि पूरी जानकारी दे रहे है किससे किसान भाइयों की पैदावार मे 100% बढ़ोतरी होगी और फसल अच्छी होगी तो किसान भाइयों कि आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। दलहनी फसलों में चने का महत्वपूर्ण स्थान है। पोषक मान की दृष्टि से चने के 100 ग्राम दाने में औसतन 11 ग्राम पानी, 21. 1 ग्राम प्रोटीन, 4.5 ग्राम वसा, 61.5 ग्राम कार्बोहाइड्रेट, 149 मि.ग्रा. कैल्शियम, 7.2 मि.ग्रा. लोहा, 0.14 मि.ग्रा. राइबोफलेविन तथा 2.3 मि.ग्रा. नियासिन पाया जाता है। इसकी हरी पत्तियाँ साग तथा दाने दाल बनाने में प्रयुक्त होते हैं। चने की दाल से अलग किया हुआ छिलका और भूसा पशुओं के चारे के काम आता है। चना दलहनी फसल होने के कारण यह जड़ों में वायुमंडलीय नाइट्रोजन स्थिर करती है। जिससे खेत की उर्वराशक्ति बढ़ती है।

Chane ki buvai

Chane ki Buvai करने के तरीके:

समय पर करें

Chane ki buvai का सही समय नवंबर माह का होता है या अधिक से अधिक दिसंबर के पहले सप्ताह तक होता है | सही समय पर चने कि बुवाई होना आवश्यक होता है ताकि किसान भाई अच्छी उपज ले सकें |

बीज का चयन

हमेशा किसान भाइयों कों ध्यान रखना चाहिए कि Chane ki buvai के लिए उच्च गुणवत्ता वाले बीजों का चयन करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। किसान भाई अगर अपनी ही फसल कों बीज के रूप मे बोना चाहते है तो एक बार से ज्यादा बार ऐसा करना सही नहीं होगा इससे फसल मे ऊमला रोग का खतरा बड़ जाता है।  बीजों में रोग प्रतिरोधक क्षमता होनी चाहिए ताकि फसल मे जड़ गलन या ऊमला जैसी समस्या ना आए।  बीज को बोने से पहले जीवाणु रोधन उपायों से उपचारित करना फायदेमंद होता है

Chane ki Buvai के लिए उन्नत देसी प्रजातियों का करें चयन

Chane ki Buvai के लिए उन्नत देसी प्रजातियां जैसे-पूसा-372, जेजी 11, जेजी 12, जेजी 16, जेजी 63, जेजी 74, जेजी 130, जेजी 32, आरएसजी 888, आरएसजी 896, डीसीपी-92-3, हरियाणा चना-1, जीएनजी 663 और उन्नत काबुली प्रजातियां जैस-पूसा चमत्कार, जवाहर काबुली चना-1, विजय, फूले जी-95311, जेजीके 1, जेजीके 2, जेजीके 3 आदि उकठा रोग रोधी का चयन करें.

सही भूमि का इंतजाम

Chane ki Buvai या चने की खेती के लिए अच्छे जल निकासी वाली भूमि सबसे ज्यादा उत्तम होती है साथ ही मध्यम से भारी मिट्टी सबसे अनुकूल होती है. बुवाई से पहले भूमि को लगभग 7-8 इंच अच्छी तरह से जोतना चाहिए और पाटा लगाना चाहिए जिससे मिट्टी बारीक हो सके जो कि पौधे के लिए उपयुक्त होती है।

Chane ki Buvai के पहले खाद और उर्वरक का संतुलन

Chane ki Buvai के समय DAP जिसमे नाइट्रोजन 18% और फास्फोरस 46% होता है, फास्फोरस हमे पता है जड़ ग्रंथी के विकास मे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, dap कों हमें 50 kg प्रति एकड़ के हिसाब से उपयोग मे लेना चाहिए। इसके साथ हम mop मयूरोटो पोटास 30 केजी प्रति एकड़ के हिसाब से उपयोग कारेगें यह दानों के विकास और वजन बढ़ाने मे अपनी भूमिका निभाता है। इसके साथ हम Sea Secret जो की प्राकृतिक उत्पाद है (IFFCO का सागरिका दानेदार,या धनुका का धनजाईम गोल्ड) 10kg प्रति एकड़ का उपयोग करेंगे इसमे प्राकृतिक हार्मोन्स होते है यह जड़ और पत्तियों को तेजी से वृद्धि कराते है और मौसम बदलने (ठंडी गर्मी) जैसी परिस्थितियों मे पौधे कों टीके रहने कि शक्ति प्रदान करते है। सल्फर 90% 5 kg प्रति एकड़ यह दलहनी व तिलहनी फसलों के उत्पादन कों बढ़ाने मे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है सल्फर का उपयोग हमें जरूर करना चाहिए इसके साथ ही माइक्रोन्यूट्रीएट्स खाद जिसमे जिंक, बोरान, कॉपर, मैंगनीज, मोलिब्डेनम पोसक तत्व पाए जाते है इसको हम 5kg प्रति एकड़ मिलना चाहिए ताकि हमने अगर पिछले वर्षों मे चने कि फसल कि पैदावार लेते आ रहे है तो इसका उपयोग बहुत जरूरी हो जाता है ताकि चने कि फसल कमजोर ना रहे और पौधा स्वस्थ और अच्छी बाड़ ले सकें। 98% वाला हुमिक एसिड 500 ग्राम से 1kg का हम उपयोग करेंगे यह जड़ों के विकास मे बहुत अच्छा काम करता है। जब भी हम इन सभी खादो कों बुआई के समय मिक्स करेंगे तब इसमे UPL का Saaf पाउडर 500 ग्राम मात्रा को लेंगे ताकि फसल कि जो उमल या जड़ रोग कि समस्या काफी हद तक कम हो जाएगी ।

  • Chane ki Buvai के समय प्रति एकड़
    • DAP- 50 kg
    • mop मयूरोटो पोटास- 30 kg
    • Sea Secret जो की प्राकृतिक उत्पाद – 10 kg
    • सल्फर 90% – 5 kg
    • माइक्रोन्यूट्रीएट्स – 5 kg
    • 98% वाला हुमिक एसिड – 500 ग्राम से 1kg
    • UPL का Saaf पाउडर – 500 ग्राम

बीजोपचार :

राइजोबियम कल्चर से बीजोपचार :

अलग-अलग दलहनी फसलों का अपना अलग-अलग राइजोबियम कल्चर होता है चने के लिए मीजोराइजोबियम साइसेरी कल्चर का प्रयोग होता है | एक पैकेट 200 ग्राम कल्चर 10 किग्रा. बीज उपचार के लिए पर्याप्त होता है | बाल्टी में 8-10 किग्रा. बीज डालकर अच्छी प्रकार मिला दिया दें ताकि सभी बीजों पर कल्चर लग जायें | इस प्रकार राइजोबियम कल्चर से सने हुए बीजों को कुछ देर बाद छाया में सुखा चाहिए |

सावधानी :

राइजोबियम कल्चर से बीज को उपचारित करने से बाद धुप में नहीं सुखाना चाहिए ओंर जहाँ तक सम्भव हो सके, बीज उपचार दोपहर के बाद करना चाहिए ताकि बीज शाम को अथवा दुसरे दिन प्रातः बोया जा सकें |

जल प्रबंधन

चने की फसल के लिए सिंचाई बहुत जरूरी नहीं होती, लेकिन अगर मिट्टी में नमी की कमी हो तो समय पर हल्की सिंचाई करें. प्राय: चने की खेती असिंचित दशा में की जाती है | यदि पानी की सुविधा हो तो फली बनते समय एक सिंचाई अवश्य करें | चने की फसल में स्प्रिंकलर (बौछारी विधि) से सिंचाई करें |

ऊपरी शाखायें तोड़ना (खुटाई)

Chane ki Buvai करने के बाद पौधे जब लगभग 20 – 25 से.मी. के हों तब शाखाओं के ऊपरी भाग को आवश्यक तोड़ दें | एसा करने से पौधों में शाखाये अधिक निकलती हैं जिससे किसान भाइयों कों चने में उपज अधिक प्राप्त होती है | लेकिन किसान भाइयों कों ध्यान रखना होगा कि चना की खुटाई बुवाई के 30–40 दिनों के भीतर पूर्ण कर लेना चाहिए 40 दिन बाद शाखाओं कों नहीं तोड़ना चाहिए |

प्रमुख बातें

किसान भाई अगर चने कि अच्छी पैदावार लेना चाहते है तो ऊपर बताए अनुसार खाद और उर्वरक का मिश्रण बना कर अपने खेत मे डाले जिससे फसल मे किसी प्रकार का कोई रोग ना लगे और चने कि फसल की पैदावार अच्छी हो सकें । चने कि फसल पैदावार अच्छी लेने कि लिए सबसे पहले अपने खेत कि जुताई अच्छी गहरी करे लगभग 7 से 8 इंच गहराई होनी ही चाहिए । अगर हो सके तो किसान भाई मिट्टी को प्लाऊ से पलटवा लें इससे जुताई तो गहरी होगी ही साथ ही खरपतवार कम होंगे। इसके बाद अच्छे बीज का चयन करें जिसकी रोगप्रतिरोधक क्षमता अधिक हो। chane ki buvai करने से पहले चने का बीजोपचार जरूर करें ताकि चने कि फसल मे जड़ रोग लगने कि संभावना कम हो सकें । अब Chane ki Buvai करने के अगले दिन आप पूरे खेत मे वजनी पटा फेर दे इससे मिट्टी अच्छे से दब जाएगी और chane ki kheti मे जो उमला रोग लगता है उसको भी हम रोक सकते है । किसान भाई ऊपर दी गई जानकारी अनुसार बुवाई कर चने कि अच्छी पैदावार ले सकते है …..

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